A Conference with the Industrialists of Kachch Kadva Gujarat Significant Importance of SOLAR & ATOMIC Power Myths/Facts
Posted by Dr. Neelam Goyal Parmanu Saheli on Saturday, November 7, 2015
Monday, 16 November 2015
Sunday, 8 November 2015
They Say...वे कहते हैं...
एक स्टेटमेंट:
मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान; कहते हैं, "हमारे राज्य में बिजली का उत्पादन बहुत अधिक है, यहां पर प्रत्येक घर में 24X7 बिजली की सप्लाई है। बिजली सरप्लस में है। दूसरे राज्य बिजली खरीदने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में, आपके (परमाणु सहेली के) ओर अधिक बिजली उत्पादन की बात को कैसे स्वीकार करें"।रियल वर्ल्ड नॉलेज:
State Wise Comparison1. क्या वास्तव में ही म.प्र. गुजरात व राजस्थान को बिजली की कोई आवश्यकता नहीं है ?
2. क्या वास्तव में ही ये पूर्ण समृद्ध राज्य हो गए हैं ?
3. म.प्र. जिसकी बिजली का उत्पादन गुजरात से आधे से भी कम है, वह भी कहता है कि हमारे यहां बिजली सरप्लस में है। ऐसा, क्योंकर कहा जाता है ?
विचार करने का एक असली मुद्दा:
Country Wise Comparisonयदि ऐसा है तो, फिर चायना, रसिया, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन, जर्मनी और यू.एस.ए., इत्यादि देश भारत या भारत के किसी भी राज्य से 5 से लेकर 14 गुना बिजली का उत्प्दान कर रहे हैं और इसके संगत इन देशों की सालाना औसत पर कैपिटा इनकम भी भारत के किसी भी राज्य से 5 से लेकर 14 गुना अधिक है। उन देशों को ओर भी बिजली चाहिए व ओर भी अधिक समृद्ध होना है, दूसरी तरफ भारत के कई राज्य बिजली उत्पादन व पर कैपिटा इनकम दोनो में ही उन समृद्ध देशों से बहुत पीछे है, फिर भी कहते हैं कि हमारे यहाँ बिजली का उत्पादन सरप्लस में हैं और हमारे राज्य विकसित हो चुके हैं।
A statement:
Madhya Pradesh, Gujarat and Rajasthan say me; "The generation of electricity is very high in our states, here is 24X7 power supply in each house. Even, power is in surplus here. Neighbourhood state is not ready to buy our power. So, what is meaning of more production of electricity".
Real World Knowledge:
Haryana, annual average 1680 units per capita power capacity and Rs. 151 500 rupees per capita income
Punjab, the annual average 1600 units per capita electricity capacity and Rs.144,000 per capita income
Gujarat, annual average 1560 units per capita power capacity and Rs. 140400 rupees per capita income
Rajasthan, the annual average per capita power capacity is 995 units and per capita income is of Rs 89550/-
India, the annual average per capita power capacity and 920 units and the average per capita income of Rs 82800/-
MP; Annual average power capacity per capita at 690 units and Rs. 62100 per capita income
UP; Annual average power capacity per capita at 350 units and Rs 31,500 per capita income
1. Really, MP. Gujarat and Rajasthan do not need of more power?
2. Really are these full prosperous states?
3. MP has around half of Gujarat still says that it has surplus power, is it true?
A Real Issue to consider:-
China, Russia, France, Japan, Britain, Germany and USA, are producing 5 to 14 times the power of any state of India. Correspondingly, Per Capita Incomes of these countries are 5 to 14 times of any state of India. Still these countries make arrangements for more production of electricity and same time want to be more financially strong. Other Side, any state of India is far behind to these countries and, yet, these states say, they have surplus power and are well developed as well !
Saturday, 7 November 2015
ABOUT PARMANU SAHELI (Dr. Neelam Goyal) परमाणु सहेली (डॉक्टर नीलम गोयल) के बारें में
परमाणु सहेली (डॉक्टर नीलम गोयल) के बारें में
मैं उस समय कक्षा आठ में पढ़ती थी, जब मेरे पिता का देहांत हुआ। मेरे पिता राजस्थान अजमेर बी.एड. कॉलेज के प्रंसीपल थे। उन्होंने शरीर त्यागने के कुछ क्षण पहले मुझे अपने पास बुलाया, अपने सीने से लगाया और कहा कि ‘‘हालात चाहे कैसे भी रहें, अपनी शिक्षा को अधूरी मत छोड़ना और स्वयं को जानना। तुम्हारा प्रत्येक कर्म मानव कल्याण हेतु होगा”। उनकी शक्ति हर पल क्षीण हो रही थी, वो कह रहे थे, ‘‘स्वयं के अस्तित्व को पाना है, सतत सृजन की राह जाना है”, और उन्होंने अपना पञ्च-भूतों निर्मित शरीर छोड़ दिया। मैं अपने पिता की बहुत ही लाड़ली बेटी थी। मेरे मन में क्रंदन था। मुझे स्वयं को आश्वस्त करना था। मुझे अब एक ही धुन रहती थी कि मुझे वही सब करना है, जिसमें मेरे पिता को खुशी मिलती। उनकी आशा के पथ पर चल कर ही मैं स्वयं में अपने पिता को पा सकती थी। मैंने विज्ञान संकाय से ग्रेजुएशन की। विज्ञान संकाय से स्नातक की शिक्षा के उपरांत, भारत सहित विश्व की इकोनॉमी को जानने की जिज्ञासा हुई। मैंने अर्थशास्त्र से स्नात्तकोत्तर किया। स्नात्तकोत्तर करते समय ही मेरे जेहन में निम्नलिखित प्रश्न घर कर चुके थे।
प्रश्नः –
- भारत की प्राकृतिक सम्पदाएँ क्या-क्या हैं और विश्व तुलना में इनका क्या स्तर है?
- भारत की अर्थव्यवस्था के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आधार क्या हैं?
- भारत के पास समग्र व उत्तरोत्तर विश्वसनीय विकास हेतु क्या-क्या योजनाएं हैं?
- भारत की सकल विद्ध्युत उत्पादन के स्त्रोत क्या-क्या हैं व उनकी उपलब्धता, महत्ता व सीमाएं कितनी-कितनी है?
- भारत की व विकसित राष्ट्रों, जैसे- फ्रांस, जर्मनी, यूके, जापान, रसिया, इत्यादि की सकल विद्ध्युत उत्पादन क्या-क्या योजनाएं, इसमें किस-किस स्त्रोत की कितनी-कितनी भागीदारी है?
- भारत की व विकसित राष्ट्रों में परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन की कितनी सहभागिता है?
- क्या परमाणु ऊर्जा से विद्युत बनाना साफ व सुरक्षित है?
- भारत की कृषि से राष्ट्र की सकल आय में वर्तमान में कितना योगदान है और कितना हो सकता है?
- भारत की कृषि का वर्तमान प्रारूप क्या है?
- भारत की कृषि के मुख्य स्तम्भ क्या हैं?
- भारत देश की व विकसित देशों की जीवन-शैलियों के स्तर क्या हैं?
- भारत के जन-सामान्य के सोचने-समझने का स्तर क्या है, आधार क्या है?
- भारत की राजनीति का प्रारूप क्या है?
- भारत के ब्यूरोक्रेट्स, राजनैतिज्ञ कार्यकर्ताओं, जन-प्रतिनिधियों, सामजिक कार्यकर्ताओं, खैख्वाहों, इत्यादि के क्या मंतव्य रहते हैं और उनका आधार क्या हैं?
- भारत में ज्वलंत मुद्दे क्या-क्या हैं और उनकी जडें क्या हैं?
- भारत में ऐसी क्या विशिष्ट कमी है, कि जिसके रहते हुए भारत विश्व के विकसित राष्ट्रों से बहुत पीछे आ गया है?
- चायना जनसंख्या की दृष्टि से भारत से आगे होते हुए भी राष्ट्रीय आय में भारत से बहुत आगे है? इत्यादि-इत्यादि।
इन सभी प्रश्नों का सार्थक और पदार्थिक उत्तर पाने के लिए मैंने वर्ष 2005 में अपना शोध कार्य प्रारम्भ कर दिया व वर्ष 2008 में राजस्थान विश्वविद्द्यालय मुझे पीएचडी की उपाधि प्रदान की। भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग ने मुझे पोस्ट डॉक्टरल प्रशिक्षण दिया वहीं से मुझे एक निक नेम मिला- ‘‘भारत की परमाणु सहेली”।
इसके उपरांत राजस्थान में महिला विश्वविद्द्यालय में मैंने असिस्टेंट प्रोफेसर का पद ज्वाईन किया।
वर्ष 2011 में जापान के फुकुशिमा शहर में आई प्राकृतिक दोहरी मार ने वहाँ के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। उस शहर का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त हो गया। काफी जान-माल की हानि हुई। ऐसे में एंटी बिजनिस लाबीज ने जापान के परमाणु बिजलीघरों के सन्दर्भ में भी विरोधात्मक प्रचार-प्रसार प्रारम्भ कर दिया।
भारत में इस प्रचार का असर यह हुआ कि तमिलनाडु के 1000 मेगावाट के कूड़नकूलम परमाणु बिजलीघर से बिजली के उत्पादन, श्रीगणेश होने से पूर्व ही, विरोध की आंधी की चपेट में बंद कर दिया गया।
जब यह सब मुझे अवगत हुआ, मैंने अपने प्राफेसर के पद से इस्तीफा दे दिया। और अपने निवास स्थान से ही अपने सन्देश के वीडियो फूटेज बनाते हुए सभी सोसियल साइटों पर रातोंरात पब्लिश किये।
भारत की 15 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी ने मेरे उन संदेशों को गंभीरता पूर्वक लेते हुए उन्हें तमिल भाषा में डब कर, वहाँ की जनता में प्रसारित करवाये।सुप्रीम कोर्ट में केस की हियरिंग के समय में भी उन वीडियो फूटेज को जूरी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।अंततः, भारत सरकार उक्त परमाणु बिजलीघर के पक्ष में वह केस जीती जिसकी बधाई मुझे कमेटी के चैयरमेन डॉक्टर डेनियल चेल्लप्पा के मॉर्फत मिली और एक प्रशस्ति पत्र भी प्राप्त हुआ।
इसके बाद हरियाणा राज्य के 2800 मेगावाट की साईट जो 7 वर्ष पूर्व ही चुन ली गयी थी, वहाँ पर विरोधों के चलते उस परमाणु बिजलीघर की स्थापना का कार्य प्रारम्भ नहीं हो पा रहा था। मैंने वहाँ पाँच महीने एक गोल ओरिएंटेड रणनीति के तहत कार्य किया और सभी विरोधों को खत्म करते हुए तथा 400 करोड़ रुपये की धन राशि बतौर मुआवजा वहाँ के किसानों में बँटवाते हुए, 6 सितम्बर 2012 को उक्त परियोजना के कार्य की आधारशिला रख दी गयी।
राजस्थान के बाँसवाड़ा जिलें में लगने वाले 2800 मेगावाट के परमाणु बिजलीघर हेतु भी मैंने सकारात्मक परिस्थितियां पैदा करवा दी है। केंद्र सरकार ने हाल ही में 450 करोड़ रूपये बतौर मुआवजा व जन कल्याण कार्यों हेतु प्रदान करने की घोषणा की है।
वर्तमान में, मैं गुजरात में हूँ। गुजरात आने का मुख्य उद्देश्य हैः - मीठी विरदी गुजरात 6000 मेगावाट अणु विद्ध्युत परियोजना का कार्य प्रारम्भ होने हेतु सकारात्मक वातावरण कायम कर देना।
मीठी विरदी गुजरात अणु विद्ध्युत परियोजना कुल 6000 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। वैसे तो, इसमें 6 वर्ष की पहले से ही देरी हो चुकी है। और एक वर्ष की देरी का मतलब है, सालाना, 3300 अरब रूपये से लेकर 33000 अरब रूपये के बराबर का विकास रुके रहना। परमाणु सहेली को इस परियोजना के मार्ग में अवरोध स्वरुप आ रही चारों चुनौतियों को निर्मूल के देना है। इसके लिए मुझे एक गोल ओरिएंटेड रणनीति का क्रियान्वयन करना है।
इन तीन पूर्व परीक्षाओं के अनुभवों से, मैं एक निष्कर्ष पर पहुंची। "भारतीय जनता जिज्ञासु है। वास्तविक संसार के ज्ञान को मन लगाकर सुनती है। अतः, एक अद्वितीय रणनीति के निष्पादन के माध्यम से है, सभी चार महत्वाकांक्षी योजनाओं के संदर्भ में RWK का माहौल पूरे भारत में स्थापित किया जाएगा। इससे चारों चुनौतियों का यकीकन सफाया होगा। इन चारों चुनौतियों के उन्मूलन के बाद, चारों योजनाओं की एक साथ ही स्थापना प्रारम्भ हो जाएगी। इनकी समयान्तर्गत सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हेत आवश्यक धन की व्यवस्था भी भारत के आर्थिक कोष में मेरी उस अद्वितीय रणनीति के मार्फ़त करदी जाती रहेगी। और फिर इन चार स्थापित योजनाओं के क्रियान्वयन से इस देश में एक सतत, विश्वसनीय और गुणात्मक सर्वांगीण विकास को वास्तविक गति मिल जाएगी। वर्ष 2035 तक, भारत का प्रत्येक गाँव पूरी तरह से विकसित होकर स्विट्ज़रलैंड की भाँती उभर कर आएगा"।
At that time, when my father died, I was studying in Class Eighth. My father was a Principle in Ajmer B. Ed. College, Rajasthan. Few moments before his death, my Head was on his Chest. He whispered, "Whatever circumstances be there, do not leave your study uncompleted. In future, you will be one of the most responsible persons for the gross welfare of the people of India". His strength was falling every moment; he was saying "To find your own existence on this Planet, you have to go through a Sustainable, Reliable and Multiplicative welfare of the people of India". Next moment his Breath had left the Body.
After graduating from Science faculty, I became curious to know the World’s Economy including India. I completed my Master degree in Economics. After the Post Graduation following questions were floating in my mind.
After completion of my Graduation in Science & Textile, I was curious to know about the Economy of India and of the well-developed countries as well. I did my Post graduation in Economics. During Post graduation the following Questions had come in my mind.
Questions: -
What are the Natural Resources of India and of the well-developed countries?
What are the Direct and Indirect Pillars of India's Economy?
What are the Plans in India for increasingly & reliable Gross All-Round Development?
What are the Resources of Gross/Mix Electricity Production in India & in other countries? What are the Availability, Importance and limitations of the Resources of Electricity Production? What is Plan of Gross Production of Electricity? What is the Percentage of Nuclear Power in Mix Electricity Production in India and in other countries?
Is Nuclear/Atomic Energy a Clean and Safe Resources to produce Electricity?
What is contribution of Agriculture in India's Gross Income? What is the Current Structure of India's Agriculture? What are the main Pillars of India's Agriculture?
What is the Living-Standard of India and of the developed countries as well?
What is the Practical Structure of Indian Politics?
What are the Burning Issues in India and what are the roots? What is the Specific Constraint, being that, India is far-far back from the well developed nations? The population of China is more than of India, yet the National Income of China is 5 to 6 times more than of India, why?
In India, what is the level of Real World Knowledge and Thinking of the General Public, Public-Representatives, Social Workers, Khairkhwahs, Rural & National Parties, Politicians, Bureaucrats, Officers & Workers and Groups, etc?
And so on and so forth.
To get the Real Practical answers for all these questions; I started research in 2005. Rajasthan University awarded me PhD in 2008. Department of Atomic Energy provided me Post Doctoral Training. At the End of the Training, I got a Nick Name "Bharat kee Parmanu Saheli" during the Farewell Party at Anushakti Bhavan, Mumbai.
I joined a post of Assistant professor in a Women University Jaipur, Rajasthan. In 2011 Japan's Fukushima city got hit by a dual natural disaster. This dual calamity ruined many lives as well industries, departments & infrastructure of the City. Nuclear Power Plants in this city also got damaged. Though no casualty happened via these NPPs but a very much negative exposure via the Anti Business Lobbies came to India against the Indian Nuclear Power Plants. The effect of this was that the 1000 MWe Kudunkulam Nuclear Power Plant of Tamil Nadu stopped forcefully by a huge protest against the NPP. This situation came in front of me. I resigned from the post of the Assistant Professor. I made Video clips/footage of the Real World Knowledge in context of Nuclear Power Plants at my own home itself and published them on the different social websites; like You Tube, Google, Face Book, etc. In the same period of time; India's 15-members expert committee for the Kudunkulam NPP was seeing these videos in public. The Chairman Mr. Daniel Chellappa sent me an online Appreciation letter. Later, during hearings of this case in Supreme Court, the concerned Jury also watched the Video Footages. The Jury took sincerely them as these RWK videos messages were delivered by Dr. Neelam Goyal who done her PhD on the concerned Topic. One day a telephonic call came to me from Dr. Denial Chellappa that “We (Indian Government) have won the case of Kudunkulam NPP”. He thanked and congratulated me for the valuable support. The Kudunkulam NPP started to generate electricity. The Operation of this does an effect on all-round development equivalent to Rs. 550 billion to Rs. 5500 billion, yearly.
After this, 2800 MW site in Haryana, selected as 7 years ago, was facing a huge protest due to the Four Challenges. I worked there for five months (June 2012 to October 2012) with a Goal-Oriented Strategy. Stone Foundation happened on 6 September 2012, unanimously. The Central Government made available Rs. 400 crore to the neighbourhood public. In future, this power plant will add an all-round development equivalent to Rs. 1500 billion to Rs. 15000 billion, yearly.
Third, 2800 MW site in Banswara district of Rajasthan, selected as 7 years ago, was also facing a huge protest due to the same four challenges. I executed Grass Root Level Public Awareness and skill enhancement activities in Bhilwara, Bikaner, Jaipur and Udaipur. The effect of these came to affirmative environments of the regional public towards the Nuclear Power Project. In the month of September 2015, Central Government announced to provide Rs. 450 crore for the local farmers and welfare of the regional public.
From these three prelims, I reached to a conclusion. "Indian Public is curious and listens carefully about the RWK" and hence, via execution of a Unique Strategy; an environment of the RWK in context of all the Four Ambitious Plans can be set in entire India and then the Four Challenges will sure be eliminated. After this elimination, a simultaneously successful establishment will get start via providing the required finance to the Indian Government. And then implementation of these four established Plans, a Sustainable, Reliable & Multiplicative All-Round Development of this Nation will get it’s the Real/deserving Pace. India’s each & every village will be well developed like Switzerland.
Currently, I am in Gujarat. The aim Gujarat Journey is to bring the day of Inauguration of 6000 MW Mithi Virdi Atomic Power Yojana. It already has been delayed 6 years. Via its successful operation, in future, yearly, an all-round development equivalent to Rs. 3000 billion to Rs. 30000 billion will come to India.
The Real World Knowledge| भारत की चारों महत्वपूर्ण योजनाओं के सन्दर्भ में वास्तविक संसार का ज्ञान
भारत की चारों महत्वपूर्ण योजनाओं के सन्दर्भ में
वास्तविक संसार का ज्ञान
- 1. भारत की समग्र विद्ध्युत उत्पादन की योजना-
- बिजली उत्पादन के सभी संभव स्त्रोतों की महत्ता एवं सीमाओं को मद्देनजर रखते हुए, भारत ने दूर दराज के क्षेत्रों वाले परिवारों में भी प्रकाश करने एवं भारत के चहुँमुखी विकास के लिए आवश्यक बिजली का उत्पादन करने के लिए वर्ष 2004 में एक योजना बनाई है।
- इस योजना के मुताबिक भारत को प्रतिव्यक्ति प्रतिवर्ष, 2000 यूनिट परमाणु ऊर्जा से, 1300 यूनिट सौर ऊर्जा से, 250-250 यूनिट जल एवं पवन से, 1000 यूनिट कोयले से व 300 यूनिट बाकि के अन्य स्त्रोतों से बनाना निश्चित किया गया।
- परमाणु ऊर्जा के अतिरिक्त, भारत अन्य किसी भी स्त्रोत से इन दरों से ज्यादा बिजली पैदा कर ही नहीं सकता है।
- भारत में सौर ऊर्जा से बिजली बनाने और परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने के सन्दर्भ में आम से लेकर खास जन की यह धारणा बनी हुई है और बना भी दी गयी है कि, सौर ऊर्जा से तो हम जब चाहें जितनी बिजली बना लेंगे और इसको बनाने में न तो किसी प्रकार कोई खतरा है और सौर पावर प्लांट्स बनाने में अपेक्षाकृत कम खर्चा आता है। अतः, परमाणु ऊर्जा से बिजली क्यों बनाने की वकालत करें; जबकि, परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने वाले परमाणु बिजलीघरों से विशाल मात्रा में जनलेवा हानिकारक विकिरणों का उत्सर्जन होता है, परमाणु बिजलीघर बम की तरह फट सकते हैं, परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाना बहुत महंगा है, भारत के पास परमाणु ईंधन है ही नहीं, परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने के लिए हमें अमेरिका, फ्रांस, रूस इत्यादि देशों की मदद लेनी पड़ती है, इत्यादि-इत्यादि। यदि यह सोच वास्तविक रूप से यथार्थ होती, सच होती तो बहुत अच्छा था, कोई मतभेद ही नहीं होता। लेकिन वास्तविकताएं पूर्णतः भिन्न हैं।
सौर ऊर्जा से भारत के प्लान के मुताबिक 1300 यूनिट प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष बिजली बननी है।
इसके लिए भारत को कम से कम 11 लाख 20 हजार मेगावाट के सौर पावर प्लांट लगाने होंगे।
इन प्लांट्स के लिए 28000 वर्ग किलोमीटर भूमि की आवश्यकता होगी और इतनी सारी भूमि यदि कृषि योग्य भूमि से लें तो यह सृजन का नहीं अपितु विनाश का रास्ता है।
इस योजना के मुताबिक भारत को अपने कुल 36000 वर्ग किलोमीटर के रेगिस्तान में से 28000 वर्ग किलोमीटर की रेगिस्तानी भूमि को सौर पावर प्लांट लगाने के प्रयोग में लाने का प्रावधान है।
सौर ऊर्जा से सतत रूप से बिजली का उत्पादन नहीं होता है। अर्थात, सौर ऊर्जा से प्राप्त बिजली न तो कार्यरत व नई-नई आने वाली इंडस्ट्रीज के लिए और न ही रेलवे के लिये आवश्यक बिजली का उत्तम, स्थिर व विश्वसनीय आधार बन सकती है।
सौर ऊर्जा पावर प्लांट अपने एक बैकप ‘पम्पड स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी स्टेशंस’ के माधयम से भारत की कृषि में सिंचाई हेतु आवश्यक पानी को सम्बंधित नदियों व तालाबों व कुओं, इत्यादि से पानी को पम्पड आऊट करने के काम आएंगे।
यह योजना भी मुख्य रूप से एक पहली योजना ‘भारत की सभी नदियों के अन्तर्सम्बन्ध की योजना’ से जुडी हुई है। यदि भारत की यह पहली योजना समयान्तर्गत सफलतापूर्वक क्रियान्वित होती है, तो ही सौर ऊर्जा की अहम योजना भी आगे बढ़ेगी।
लेकिन भारत की पहली योजना ही भ्रांतियों, पूर्वाग्रहों, क्षेत्रीय नेताओं, जन-प्रतिनिधियों, तथाकथित खैरख्वाहों की वजह से विरोधों का शिकार बनी हुई है, तब, कैसे कर भारत सौर ऊर्जा योजना के सफलता पूर्वक क्रियान्वयन का दावा कर सकते हैं!!!
सबसे अहम दो बाते ओर भी हैं- सौर ऊर्जा से प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति औसतन 115 यूनिट के हिसाब से भारत की पूरी जनता को बिजली मुहैया करवाने के लिए 100,000 मेगावाट के सौर पावर प्लांट लगाने होंगे जिनकी स्थापना का खर्चा 16000 अरब रूपये के बराबर होगा।
भारत की योजना के मुताबिक़ 1300 यूनिट प्रतिव्यक्ति प्रतिवर्ष के हिसाब से सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के लिए तकरीबन 11,00,000 मेगावाट के सौर पावर प्लांट लगाने होंगे, जिनके स्थापन का खर्चा तकरीबन 1,73,000 अरब रूपये आएगा।
सौर ऊर्जा के 1000 मेगावाट के पावर प्लांट से 70 अरब रूपये से लेकर 420 अरब रूपये के बराबर के विकास में बढ़ोतरी होती है।
जो हमारे सौर पेनल्स हैं, उनसे हम कुछ किलोवाट तक की ही बिजली प्राप्त कर सकते हैं।
सौर पेनल्स हमारे घरों में, पार्क में, कार्यालयों में रोशनी देने का आधार बन सकते हैं।
लेकिन इंडस्ट्रीज और इंफ्रास्ट्रक्चर को वृहत्त मात्रा में आवश्यक बिजली हेतु तो कई हजारों मेगावाट के सतत्, स्थिर व विश्वसनीय रूप में कार्यरत पावर प्लांट्स चाहिए।
सौर प्लांट्स से सतत व स्थिर बिजली प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
और यदि इसमें जन हानि के खतरे की बात करें तो सौर प्लांट्स से इस दर की बिजली बनाने में 25000 व्यक्तियों के हताहत होने की संभावना रहती ही है।
अब हम आते है, परमाणु ऊर्जा पर
परमाणु ऊर्जा से 1300 यूनिट सालाना प्रतिव्यक्ति बिजली प्राप्त करने के लिए 600 वर्ग किलोमीटर भूमि की आवश्यकता होगी।
परमाणु ऊर्जा के 1000 मेगावाट के पावर प्लांट से 550 अरब रूपये से लेकर 5500 अरब रूपये के बराबर के विकास में बढ़ोतरी होती है।
परमाणु ऊर्जा से प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति औसतन 115 यूनिट के हिसाब से भारत की पूरी जनता को बिजली मुहैया करवाने के लिए 330 अरब रूपये की लागत के पावर प्लांट लगाने होंगे।
भारत की योजना के मुताबिक़ 2000 यूनिट प्रतिव्यक्ति प्रतिवर्ष के हिसाब से परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन के लिए तकरीबन 4,80,000 मेगावाट के परमाणु पावर प्लांट लगाने होंगे, जिनके स्थापन का खर्चा तकरीबन 96,000 अरब रूपये आएगा।
इतनी दर से बिजली प्राप्त करने में 300 व्यक्तियों के हताहत होने की सिर्फ संभावना रहेगी।
भारत के पास ईंधन की किसी प्रकार से कोई कमी नहीं है।
भारत आज यदि 153 हजार मेगावाट के परमाणु बिजलीघर लगाने हेतु बाहरी सहायता ले रहा है तो सिर्फ इसलिए कि बिजली की किल्ल्त भरे कठिन समय में बिजली की कमी की वजह से भारत में अराजकता न फैल जाए।
भारत के पास अपना थोरियम चक्र तकरीबन तैयार हो चुका है।
आने वाले समय में भारत परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने के सन्दर्भ में स्वयं ही आत्मनिर्भर हो जाएगा।
अकेली परमाणु ऊर्जा के बल पर कई सदियों तक बिजली की डिमांड को भारत सतत रूप से पूरी करता रहेगा।
यह एक अकाट्य सत्य है कि परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाना हर लिहाज से सर्वोत्तम है, लेकिन विज्ञान व तकनीकि के सन्दर्भ में वास्तविक संसार के ज्ञान से अनजान होने और भ्रांतियों एवं पूर्वाग्रहों व तथाकथित खैख्वाह के चलते इसी स्त्रोत का भारत में सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। जहाँ तक बात ईंधन से लेकर इन परमाणु बिजलीघरों की स्थापना, प्रचालन और रक्षण-अनुरक्षण की है, तो हकीकत यह है कि भारत इस क्षेत्र में समूचे विश्व में सबसे ज्यादा श्रेष्ठ हो चुका है। इसके आलावा, कोयला, जल, हवा और अन्य भारत की आवश्यक बिजली की पूर्ति करने में नितांत रूप से असक्षम है। 250-250 यूनिट जल एवं पवन से, 1000 यूनिट कोयले से व 300 यूनिट इनमें से जल से अधिकतम सीमा में बन सकती है।
इस थोड़ी सी ही सच्चाई से यह बात तो स्पष्ट हो जाती है कि हमें सभी स्त्रोतों से उनकी उपलबधता एवं महत्वता को मद्देनजर रखते हुए बिजली का उत्पादन करना होगा। साथ ही, हमारी सभी नदियों के अन्तर्सम्बन्ध की योजना का भी समान्तरीय रूप से क्रियान्वयन होना होगा।
भारत की कृषि के सन्दर्भ में वास्तविक ज्ञान के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:
- भारत की 68 प्रतिशत जनता ग्रामीण इलाकों में निवास करती है।
- इस 68 प्रतिशत जनता का जीविकोपार्जन का माध्यम येन-केन प्रकारेण कृषि ही है।
- भारत की 1600 लाख हेक्टेयर कुल उपजाऊ भूमि में से 826 लाख हेक्टेयर भूमि पर ही कृषि होती है।
- भारत की 874 लाख हेक्टेयर बुवाई योग्य भूमि बंजर पडी हुई है।
- भारत की सम्पूर्ण कृषि विकेंद्रीकृत है। अर्थात, भारत का 90 प्रतिशत भूस्वामी अपनी जमीन पर खेती करने के लिए अपने ही क्षेत्र के किसी जरूरतमंद को या तो पाणत (आधे बट पर) पर या लीज पर दे देता है। यह जरूरतमंद इंसान पाणत या लीज पर ली गयी इस भूमि पर बहुत ही सहज और साधारण तरीके से खेती-बाड़ी करता है। इस प्रकार की खेती से उसे अपना पेट भरने तक की व्यवस्था भी मुश्किल से हो पाती है, आय की बात तो बहुत दूर रहती है।
- भारत की केवल 305.6 लाख हेटेयर भूमि पर ही सिंचाई की व्यवस्था है।
- भारत की प्रति हेक्टेयर भूमि से औसतन 2200 किलोग्राम अनाज का उत्पादन होता है
- विकसित देशों में यह 6500 किलोग्राम से लेकर 8000 किलोग्राम तक का है।
- भारत की कृषि में विज्ञान व तकनीकि के विभिन्न अनुप्रयोगों का प्रयोग बहुत ही सीमित है।
- भारत में आवागमन की व्यवस्था का स्तर विकसित देशों की आवागमन व्यवस्था का 15 प्रतिशत तक का भी नहीं है ।
- कई बार तो बाढ़, सूखे तथा उचित भंडारण, आवागमन व खुरदरे बाजार की व्यवस्था न होने की वजह से किसान की फसल पानी के भाव तथा पूरी तरह से बेकार भी हो जाती रही है।
- भारतीय किसान को उसके उत्पाद की कीमत औसतन 12 रूपये तक ही मिल पाती है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर उसी उत्पाद को बाजार से 100 रूपये में खरीदता है। विकसित देशों में, किसान को अपने उत्पाद की कीमत 65 से 75 रूपये तक मिल जाती है, बाद में यदि उसको जरूरत पड़ती है तो यही वस्तु वह 100 रूपये में खरीदता है।
भारत की कृषि के नौ मुख्य स्तम्भ हैं: -
- 1.स्थिर एवं विश्वसनीय सिंचाई;
- 2.उचित गुणवत्ता के बीज;
- 3. उचित गुणवत्ता के खाद;
- 4.फसल की कटाई;
- 5. भंडारण,
- 6. यातायात व सड़कें;
- 7. बाजार;
- 8. तैयार माल की कीमत; और सबसे महत्वपूर्ण,
- 9. प्रबंधन।
वर्तमान में, भारत की कृषि के इन नौ स्तम्भों के स्तर के मुताबिक़; कृषि व इसके सहयोगियों से राष्ट्र की सकल आय में योगदान, मात्र 18,150 अरब रूपये के बराबर का रहा।
भारत की कृषि के इन 9 स्तम्भों के स्तर को उत्कृष्ठता के शीर्ष तक पहुँचना है। भारत की 1600 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि का केन्द्रीयकरण होना है। यह केन्द्रीयकरण इस प्रकार से होना है कि इस पर स्वामित्व तो सम्बंधित भू-स्वामियों का ही रहेगा, लेकिन इस जमीन को प्रतिवर्ष स्वदेशी कम्पनीयों द्वारा या सरकार द्वारा लीज पर ले लिया जाना होगा। इससे भू-स्वामियों को गुणात्मक रूप से लाभ होगा। इस प्रकार का केन्द्रीयकरण भू-स्वामियों को भी स्वीकार्य होगा। और, ऐसा तभी संभव है जब भारत की जनता भारत के सन्दर्भ में इन हकीकतों से रूबरू हो सकेगी !
इस महान लोकतांत्रिक देश में ऐसा हो पाया तो ही; भारत की यही कृषि व इसके सहयोगी, भारत की सकल आय में, सालाना, 21 लाख अरब रूपये के बराबर का योगदान करने लगेंगे।
भारत की एक ओर महत्वाकांक्षी योजना ‘‘सभी नदियों के अन्तर्सम्बन्ध की योजना”
- इस योजना के सन्दर्भ में भी पूरा भारत पक्ष-विपक्ष में बँट गया है।
- और भारत की यह योजना भी कछुए से भी धीमी गति से आगे बढ़ रही है।
- एक पक्ष कहता है कि, यह योजना देश की अर्थव्यवस्था की समृद्धता, अर्थात, चहुँमुखी विकास के लिए सबसे उत्तम योजना है, अतः इसे फलीभूत होना ही चाहिए।
- दूसरा पक्ष कहता है कि भारत की सभी नदियों को आपस में जोड़ने का कार्य प्रकृति विरूद्ध प्रयास हो सकता है।
लेकिन, शाश्वत और सत्य तथ्य तो यही है कि, जब मानव जाति इस धरा पर थी ही नहीं और पृथ्वी पर प्रकृति अपने पूर्ण लावण्य पर थी, उस समय भारत की सारी नदियां आपसे में इंटर लिंक्ड थीं। हाँ, इस धरा पर जैसे-जैसे विभिन्न जीव-जंतुओं के साथ-साथ मानव जाति का भी प्रादुर्भाव बढ़ता गया, वैसे-वैसे ये नदियां सिकुड़ती, बदलती और सिमटती चली गईं, कुछ तो लुप्त प्रायः हो चुकी हैं।
उदाहरणार्थ, थार की रेगिस्तानी भूमि।
इतिहास कारों व अन्वेषणकर्ताओं के मुताबिक वहाँ पहले सरस्वती नदी बहा करती थी। यह भू-भाग गहरे वनों से पूरी तरह से आच्छादित था।
मानव ने जब मांसाहारी जंतुओं, जैसे शेर, चीते, सियार, इत्यादि को लगभग उस हिस्से से खत्म कर दिया, तब ऐसे जंतु बच गए जो सिर्फ घास और पेड़-पौधों पर आश्रित थे।
इन बचे हुए शाकाहारी जंतुओं ने उस हिस्से की अधिकतम वनस्पति चर डाली।
वर्षा की कमी हो गयी। वनस्पति जगत भी धीरे-धीरे लुप्त हो गया।
उस भू-भाग से कुछ जीव-जंतु तो अन्यंत्र पलायन कर गए और बहुत कुछ तो लुप्त ही हो गए, रह गया तो सिर्फ थार का रेगिस्तान।
मानव ने अपने आप को हड़बड़ी पूर्वक जीवित रखने और अपने मौज-शौकों को पूरा करने के चक्कर में अंधाधुंध पेड़ों की कटाई की, जीव-जंतुओं को मारा और प्रकृति को असंतुलित कर दिया, फलतः सभी नदियां एक-दूसरी से पृथक होती चली गईं।
आज वह सभी नदियों को जोड़ने की बात करता है और भारत की समूचि धरा को अपने स्वहित के चलते हरा-भरा कर देना चाहता है, तो मानव का यह कृत्य प्रकृति विरूद्ध नहीं, अपितु संगत ही है।
सभी नदियों का पुनः अन्तर्सम्बन्ध बनने से भारत की पूरी जमीन हरी-भरी होगी, तो जाहिर सी बात है कि प्रकृति पुनः स्वयं अपनी यौवन अवस्था में आ सकेगी।
हिन्दू-धर्म के मुताबिक गंगा-जमुना-सरस्वती का संगम था। आज नहीं है। लेकिन, उसी संगम की याद में, उस संगम की महत्ता के भावों में- कुम्भ का मेला आज भी लगता है और सदियों तक लगता रहेगा।
भारत में गंगा-जमुना-सरस्वती नदियों के संगम स्थल पर हर साल लगने वाले तीर्थ मेले में संसार भर से लोग आते हैं। भारत के ग्रामीण आँचल की जनता तो इस स्थान पर जाने मात्र में ही अपने जीवन की सार्थकता सफल करती है, तो फिर, संगम को तीर्थ मानने वाली जनता फिर कैसे कर नदियों के अन्तर्सम्बन्ध का विरोध करे!
हाँ, जनता अज्ञानी है, वह संगम को धार्मिक परिपेक्ष्य में तीर्थ तो मानती है, लेकिन संगम की भौतिक महत्ता से पूरी तरह से अनजान है। उसकी इसी अन्जानी प्रवृति का नाजायज फायदा उठाते हैं, कुछ तथाकथित रूप से ज्ञानी व स्वार्थी लोग।
Concept of Parmanu Saheli (Dr. Neelam Goyal) | विचार परमाणु सहेली
विचार (Concept): भारत के सकल विकास, अर्थात, अर्थव्यवस्था का वर्तमान स्वरुप
- भारत के चहुँमुखी विकास के तीन आधारभूत स्तम्भ हैं- 1. कृषि, 2. उद्द्योग-धंधे व 3. सेवायें।
- तीनों स्तम्भों की नींव है- ऊर्जा (मुख्यतया, विद्युत ऊर्जा)
- भारत की चार महत्वाकांक्षी योजनाएं-
- भारत की सभी नदियों का अन्तर्सम्बन्ध
- भारत में गाँवों को गाँवो से, गाँवों को कस्बों से, कस्बों को कस्बों से, कस्बों को शहरों से व शहरों को राजधानियों से जोड़ते हुए राज मार्गों की स्थिर व विश्वसनीय व्यवस्था
- भारत में प्रतिवर्ष, औसतन, 5000 यूनिट प्रति-व्यक्ति समग्र विद्ध्युत का उत्पादन
- भारत की समग्र उपजाऊ भूमि 1600 लाख हेक्टेयर पर स्वदेशी उत्कृष्ट केन्द्रीयकृत कृषि प्रबंधन
10 से 25 वर्ष पूर्व वाली भारत की चारों महत्वपूर्ण योजनाओं का यदि समयान्तर्गत सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हो रहा होता तो आज भारत की सालाना प्रति व्यक्ति औसत आय 15 लाख रूपये तक हो चुकी होती (वर्तमान में यह आय मात्र 80,500 रूपये है)। भारत की 68 प्रतिशत जनता जो ग्रामीण देहातों में बसती है, और जिसकी वर्तमान में सालाना औसत आय मात्र 12,000 रूपये है, की भी यह आय 12 लाख रूपये तक पहुँच रही होती। चायना की प्रति व्यक्ति यह आय 5.50 लाख रूपये है, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन, रसिया, जर्मनी की प्रति व्यक्ति यह आय 15 लाख रूपये से लेकर 22 लाख रूपये तक है। अमेरिका की प्रति व्यक्ति यह आय 32 लाख रूपये है।
भारत के पास विश्व के किसी भी अन्य देश की अपेक्षाकृत गुणात्मक रूप से ज्यादा प्राकृतिक सम्पदा है। भारत के पास उत्कृष्ट कोटि के अर्थशास्त्री, शासक, प्रशासक, वैज्ञानिक, विचारक, योजनाकार, उद्द्योगपति, प्रबंधक, न्यायाधीश, इंजीनियर, अधिकारी, कर्मचारी, कार्यदक्ष व कामगार भी हैं। और भारत की अपने व्यापार मित्र देशों के साथ सकारात्मकता की परिस्थितियाँ भी हैं। पूरे विश्व में भारत की संस्कृति भी सर्वोच्च कोटि की रही है। भारत की जनता की जींस क्वालिटी भी सर्वोत्कृष्ट है। भारत का लोकतंत्र सर्वोच्च कोटि का है।
इस सबके बावजूद, ऐसी क्या कमी है कि, भारत में समग्र जन-कल्याण समग्र-विकास की चारों महत्वपूर्ण योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के रास्ते में निम्न चार प्रकार चुनौतियां दीवार बन कर खड़ी रहती हैं?
पहली चुनौति, अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध;
दूसरी, अंतर्राज्यीय सम्बन्ध;
तीसरी, मुआवजा राशि; व
चौथी चुनौति, बजट समस्याए
इन चारों चुनौतियों की बैकबोन है- "भारत की टॉप-टू-बॉटम जनता में उक्त चार महत्वपूर्ण योजनाओं के सन्दर्भ में वास्तविक संसार के ज्ञान की कमी"।
क्षेत्रीय जन-प्रतिनिधि, क्षेत्रीय पार्टी कार्यकर्ता, एंटी एक्टीविस्ट बिजनिस लाबीज, तथाकथि ब्यूरोक्रेट्स, तथाकथित बाबू वर्ग व मुख्यतया तथाकथित समाजसेवी व् खैरख्वाह से जुड़कर बनी स्वहित में जीनेवाली इस 5 प्रतिशत जनता ने बाकि की 99 प्रतिशत जनता के दिलों-दिमाग व सोचने-समझने की शक्ति पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर कब्जा कर रखा है। भारत की 5 प्रतिशत जनता ने 99 प्रतिशत जनता को विभिन्न दिशाओं में चला रखा है। उसका नेट परिणाम यह हो रहा है कि भारत की ये चारों योजनाएं मृत प्रायः है, या इनके क्रियान्वयन की गति कछुए से भी धीमी रही है।
परमाणु सहेली के मिशन:
1. समग्र भारत में करने योग्य कार्य की स्थापना
2. चारों चौनोतियों का निर्मूलन
3. समान्तरीय रूप से चारों योजनाओं की सफल स्थापना
4. भारत में एक सतत, विश्वसनीय व उतरोतर सर्वांगीण विकास का प्रारम्भ
मेरी मंजिल: एन एन भारत (नव निर्मित भारत)
यह सब कैसे संभव हो सकेगा, इसके लिए एक विशिष्ट रणनीति व उसके क्रियान्वयन हेतु पूरी तैयारी हो चुकी है।
प्रत्येक भारतीय का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह स्वयं भी अपनी नैतिक जिम्मेदारी और कार्मिक कर्तव्य को समझें।
Concept: The Current Structure of the Gross Development or the Economy of India
- For All-Round Development of India, three are three Basic Pillars: 1. Agriculture, 2. Industries, and 3. Services
- The Backbone of these three Pillars is Energy (mainly, Electricity)
- India must have Four ambitious Plans:
1. Interlinking of all the Rivers
2. A Grade Stable & Reliable Transportation Arrangement from Village to Village, Village to Town, Town to Town, Town to City, City to City, and Capital to Capital
3. Gross Production of average 5000 units Electricity per Capita, yearly (1000 units from Solar, 2000 units from Nuclear, 1000 units from Coal and 1000 units from the rest of the resources)
4. Agriculture on the Gross Fertile Land via an Excellent Indigenous Agriculture Management
If, the Four Most Ambitious Plans had been successfully implemented, then India's annual average Per Capita Income would have been up to ₹ 15 lakh (currently, ₹ 80, 500/- only). And the annual average Per Capita Income of the 68% Rural Population would have been ₹ 12 lakh (currently, only ₹ 12,000/-).
India has multiplicative Natural Resources compare to any of other country in this World. India has Great Economists, Excellent Politician, Administrators, Scientists, Thinkers, Planning Makers, Judges, Industrialists, Businessmen, Executives, Managers, Engineers, Doctors, Officers, Employees and Tradesman. India's Culture is of an Excellent Class. Indian People's Jeans Quality is Excellent. Bharat maintains Positive Relation with its Business Friendly Countries and is regarded as Most Honorable Democratic Country as well.
Yet, there comes a Huge Wall of Four Challenges in the Path of a successful implementation of the Four Most Ambitious Plans in India.
The Four Challenges are: 1. Inter Nations’ Relations; 2. Inter States’ Relations; 3. Financial Budget; and, 4. Compensation Money
Who is the main culprit or what is the base of creating the four challenges in the path of a successful implementation of these most precious Plans?
The Culprit or Base or Backbone of these Four Challenges is “Lack of the Real World Knowledge in the Top-to-Bottom Public of the nation about the Four Most Ambitious Plans”.
Due to The Lack of the Real World Knowledge, the 5% Population of So-called Social & Public Representatives, Regional & National Political Party Workers & Leaders, Anti Business Lobbies, So-called Bureaucrats, So-called Clerical Staff, etc., for their own causes, governs rest of the 95% Population of India.
Mission of Parmanu Saheli (Dr. Neelam Goyal):
1. Establishment of Real World Knowledge in all-over Nation
2. Elimination of the Four Chalaanges
3. Simultaneous & Sucessfull Implimentation of the Four Most Ambitious Plans
4. Establishment a sustainable, Reliable & Multiplicative All-Round Development of India
My Goal: NN INDIA (New Nation India)
To work on this Mission and to achieve the Goal, one Unique Strategy has been structured. Name of the Mission is "NN Mission (Nav Nirmaan") and Name of the Strategy is "THE THREE"
Thursday, 5 November 2015
Current Situation of Indian Atomic Power Program |Dr. Neelam Goyal| |Gujarat May 2015| |Real World Knowledge|
Posted by DrNeelam Goyal on Thursday, June 11, 2015
Gujarat Conference/Seminar/Meeting | 25 June 2015 |
Posted by DrNeelam Goyal on Friday, June 26, 2015
Gujarat Conference/Seminar/Meeting | 27 June 2015 |
Posted by DrNeelam Goyal on Sunday, June 28, 2015
Gujarat Conference/Seminar/Meeting | 28 June 2015 |
Posted by DrNeelam Goyal on Monday, June 29, 2015
Gujarat Conference/Seminar/Meeting | 28 June 2015 |
Posted by DrNeelam Goyal on Monday, June 29, 2015
Media Coverage Gujarat Conference/Seminar/Meeting | June 2015 |
Posted by DrNeelam Goyal on Tuesday, June 30, 2015
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